दिल की पवित्रता, जीवन में बिजली पैदा करता है।
Sunday, December 30, 2012
Thursday, December 27, 2012
कर गयी खून!!!
उन्हें रोकने की चाहत, मेरी हसरत बन गयी ,
पर न जाने क्यों ,
उनपर जाने का, सवार हो गया जूनून,,
वो तो चली गयी,,
पर मेरी हसरतों का कर गयी खून!!!
Monday, December 10, 2012
ज़िन्दगी जीने का तरीका तो तुम्हें आता है !!!
एक वक़्त था , मुझे बहुत नाज़ होता था , हमें हमारी दोस्तों की दोस्ती पे,
शायद वक़्त और हालत पे .............मैं गलत हो सकता हूँ ,
पर एक दिन ऐसा भी आया, मैं सुकून से सोया था ,
बिस्तर तो मेरा था, और जगह भी मेरी थी ,
आये मेरे सारे दोस्त ............मेरे ही मय्यत पे,,,,
और आकर कहने लगे
कितनी देर है अभी दफनाने में !!
जल्दी करो हमें ......घर जाना है !!
कपडे दान कर, नया खरीदकर , नहाना है,,
दिनभर के नुकसान को भी , संभालना है,,
हे दोस्त, मेरे दोस्त, तेरे पे नाज़ आता है ,,
झूठे गम सही, ज़िन्दगी जीने का तरीका तो तुम्हें आता है !!!
Monday, December 3, 2012
आज तलाश में मेरी निकले हैं
तमाशा देख रहे थे जो कभी, मेरे डूबने का मंज़र देखकर !
आज तलाश में मेरी निकले हैं .......... कश्तियाँ लेकर !!!
Sunday, December 2, 2012
हमारी ही दुकान पर !!!
हम खुद ही कभी बेचा करते थे ........... "दर्द ये दिल" की दवा ,,
और आज वक़्त ने ऐसा रुख पलटा की , खड़ा कर दिया हमें,
ख़ुद ..................हमारी ही दुकान पर !!!
Monday, November 26, 2012
वीरान तुम भी हो
माना की हम हैं उजड़े हुए शहर की मिसाल .....!!
मगर आंखे बता रही है , वीरान तुम भी हो .....!!!
जब होश में आया
अपनों को जोड़ने में इतने मगन हो गए थे हम ...... मनो खो गए थे हम ,,
और जब होश में आया तो .......... अपने वजूद के बिखरे टुकड़े को देखा !!
मुहब्बत की दुकान
ना पूछिये तो बेहतर होगा की क्या हाल है ........... मेरे कारोबार का,,
मुहब्बत की दुकान चला रहा हुं मैं ...........नफ़रतों की इस बाज़ार में !!
Friday, November 16, 2012
फिर ज़रूरत क्या थी
ज़रूरत क्या थी तुम्हें, ........ फासले बढ़ाने की,
ज़रूरत क्या थी तुम्हें, .....मुझसे रूठ जाने की ।।
अब जो उदास रहते हो मुझसे रूठकर,,
ज़रूरत क्या थी ......मुझसे हाथ छुड़ाने की ।।
किसी के गम को ये ज़ालिम दुनिया, अपना गम नहीं समझती
ज़रूरत क्या थी, तुम्हे अपना गम दुनिया को दिखने की ।।
काश तुम ..........ये समझ पाती ............................,,
कि हर- पल मैं तुम्हारे साथ था ,,
फिर ज़रूरत क्या थी, ........... तुम्हें इस ज़माने की |||
शुरुवात तो दो
हर दिन ......... एक ख़्वाब दो ज़िन्दगी को,
चाहे पूरा हो या न हो ... पर दिल से आवाज़ तो दो ।।
देखना एक दिन ऐसा भी आएगा, पुरे होंगें आपके सारे ख़्वाब,,
उन ख़्वाबों को बस एक शुरुवात तो दो ।।।
Tuesday, October 30, 2012
मुझको उड़ा दिया
तमाशा बना दिया, मेरी ज़िन्दगी का
भरी महफ़िल में तन्हा बिठा दिया ।
ऐसी क्या नफरत थी, मेरे मासूम दिल से
खुशियाँ छिनकर ग़म ज़दा बना दिया ।।
नाज़ था कभी मुझे उसकी वफ़ा पर
आज तो उसने मुझे, मेरी ही नज़रों में गिरा दिया ।
खुद बेवफा थी, मेरी वफ़ा का भला क्या क़द्र होता
अनमोल था मेरा प्यार, ख़ाक में मिला दिया ।।
शायद उसकी फितरत में शुमार नहीं किसी को याद करना
इसलिए तो, हवा का झोका समझकर मुझको उड़ा दिया ।।।
आपकी भी ऑंखें
हम उन्हें चाहते रहे दुनियां से बेखबर होकर ।
और एक वो हैं, जो आजमाते रहे रह रह कर ।।
उनकी इन् हरकतों को नज़रअंदाज करता गया ।
और पल - पल घुट -घुट के मरता गया ।।
सोचा एक न एक दिन उन्हें,
अपनी गलती का एहसास होगा ।
मेरी तमाम ख्वाहिश , और मेरा ये दिल
उनके दिल के आस- पास होगा ।।
क्या ये तमाम मुरादें, हकीकत हो पाती हैं
जानने हा हक आपको भी है दोस्त
या आपकी भी ऑंखें, आंसूओं से भर जाती हैं ।।।
कुछ हो सा गया है
लिखना चाहता हूँ ....... बहुत कुछ आज
पर शब्द हैं की , गुम से गए हैं
अश्क भी नहीं है अब आँखों में
फिर भी न जाने क्यों, कुछ हो सा गया है
जी चाहता है खुब ज़ोर से चिल्लाऊं
पर आवाज़ गले में, रुन्धने लगी है
आत्मा की बातें खुद को समझाउं भी तो कैसे
ये मन है जो , कुछ सो सा गया है ........
लिखना चाहता हूँ .................................................!
पर शब्द है की ......................................................!
बेकरारी सी छाने लगी है,
ज़िन्दगी में खुद से नाराज़गी बढ़ने लगी है
पर कुछ और पाने की चाहत से
रग - रग दर्द से , कुछ रो सा गया है ...
लिखना चाहता हूँ .................................................!
पर शब्द है की ......................................................!
पर शब्द हैं की , गुम से गए हैं
अश्क भी नहीं है अब आँखों में
फिर भी न जाने क्यों, कुछ हो सा गया है
जी चाहता है खुब ज़ोर से चिल्लाऊं
पर आवाज़ गले में, रुन्धने लगी है
आत्मा की बातें खुद को समझाउं भी तो कैसे
ये मन है जो , कुछ सो सा गया है ........
लिखना चाहता हूँ .................................................!
पर शब्द है की ......................................................!
बेकरारी सी छाने लगी है,
ज़िन्दगी में खुद से नाराज़गी बढ़ने लगी है
पर कुछ और पाने की चाहत से
रग - रग दर्द से , कुछ रो सा गया है ...
लिखना चाहता हूँ .................................................!
पर शब्द है की ......................................................!
Friday, October 19, 2012
कहीं उनकी नींद न टूट जाए
हीर - राँझा , श्री - फरहाद की प्रेम के किस्से को लोगों ने दिल में बसाया है
कहानियों से निकल कर एक और आशिक उभर आया है
इसकी कहानी, सारी प्रेम गाथा से निराली है
अश्कों से भरी वो प्याली है
जो छलक जाए तो ज़ाम है, और गिर जाए तो बदनाम है
इनके प्यार को न लग जाए ज़माने की नज़र
आशिक की महबूबा आशिक के दिल पे सर रखकर सोयी थी बेखबर
आशिक ने धड़कन ही रोक ली की, कहीं उनकी नींद न टूट जाए
Thursday, October 18, 2012
Wednesday, October 17, 2012
तन्हाई के काबिल ना थी

लोग ज़िन्दगी को जी भरकर जी लेने को कहते हैं
पर अपनी नज़रों से देखा तो, हर कोई मतलबी लगा मुझे
इसलिए लोगों से मिलना जुलना छोड़ दिया
वर्ना मेरी ये छोटी सी उम्र और ये प्यारी सी ज़िन्दगी
तन्हाई के काबिल ना थी
Monday, October 15, 2012
वो आंसू भी था तो किसी और के लिए
उम्मीदों की ख्वाहिश पाले दिल में
चलते रहें अंजान राहों पे हम
मंज़र डरावना है, पर उनसे मिलने की चाहत में
Thursday, October 4, 2012
Wednesday, October 3, 2012
Friday, September 7, 2012
चंद कागज के टुकड़ों में
अब किसी को अपना कहने की हिम्मत कैसे करें
लोगों की नीयत अपने हल्कों से फिसलने लगे हैं
चाहत थी कुछ को जोड़कर कारवां बनाने की
पर क्या करें यहाँ तो लोग चंद कागज के टुकड़ों में बिकने लगे हैं
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