ज़रूरत क्या थी तुम्हें, ........ फासले बढ़ाने की,
ज़रूरत क्या थी तुम्हें, .....मुझसे रूठ जाने की ।।
अब जो उदास रहते हो मुझसे रूठकर,,
ज़रूरत क्या थी ......मुझसे हाथ छुड़ाने की ।।
किसी के गम को ये ज़ालिम दुनिया, अपना गम नहीं समझती
ज़रूरत क्या थी, तुम्हे अपना गम दुनिया को दिखने की ।।
काश तुम ..........ये समझ पाती ............................,,
कि हर- पल मैं तुम्हारे साथ था ,,
फिर ज़रूरत क्या थी, ........... तुम्हें इस ज़माने की |||


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