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ज़िन्दगी

Monday, May 11, 2015

satya vachan

गुस्से में इंसान बेकार की बातें तो करता है, पर कई बार दिल की बात भी कह जाता है !!
बस जीने की वजह बदल जाती है, ये ज़िन्दगी तू इम्तिहान न ले, हौसलों की स्याही अभी बाकी है !!
जिस दिन आपने अपनी सोच बड़ी कर ली, देखना बड़े बड़े लोग आपके बारे में सोचना शुरू कर देंगें !!
जो लोग मेरी पीठ पीछे बुराई करते हैं, मैं उन्हें पसंद करता हूँ, ये वही लोग है जो हमारा निशुल्क प्रचार करते हैं
ज़िन्दगी का सबसे हंसीं पल जब आप कहें की मैं ठीक हूँ, और आपका दोस्त आपकी आँखों में देखकर ये बोले बता यार बात क्या है
आपकी सोच पर ही निर्भर करता है आपका भविष्य ? मान लो तो हार और ठान लो तो जीत !!
ज़िन्दगी को जी भरकर जीयो हर पल तुम्हारा है, बाकी सब कैलेंडर की तारीखें ही हैं !!
बड़ी बड़ी बातें करने से इंसान समझदार नहीं हो जाता, समझदारी तब कहलाती है, जब वो छोटी छोटी बातें समझने लगे !!

Monday, July 28, 2014

जान लेने चला है !!

सुनकर हमारी नज़्म,  वो  पहलू  बदलकर बोलीं ,
कोई कलम छीनो  इससे,  ये तो जान लेने चला है !!








हर लम्हा





जनता हूँ , और ऐसा मानता भी हूँ ,
मालूम है और महसूस भी,
की मुमकिन नहीं की वो हमें याद करे ?
फिर भी न जाने क्यों  … हिचकी का इंतज़ार  हर लम्हा रहता है। 

क़दमों के नीचे

सुकून की ज़िन्दगी जीने की राह में  निकल चला था मैं,

तभी अतीत का एक पन्ना मेरे क़दमों के नीचे  आ गया। 

बदनाम मत करना।









ग़र  टूट जाए रिश्ते कभी अपनों से,
राज़ की बात आम मत करना।
ज़िन्दगी बस चार दिन की है, 
दोस्ती जैसे रिश्ते को बदनाम मत करना।




















































Sunday, December 22, 2013

खुद से तेरी हर बात छेड़ता ज़रूर हूँ !

तन्हाई के लम्हे में घुटता रहता हूँ,
फिर भी आपके लिए कुछ लिखता रहता हूँ,
मुस्कानों से कोई रिश्ता बचा तो नहीं है,
फिर भी मुस्कुराते दिखता  ज़रूर हूँ ,
जिन रास्तों पे चलते थे, हम साथ कभी,
उन रास्तों से , आज भी मिलता ज़रूर हूँ,
अकेला  बैठकर आंसुओं के झील में,
तन्हाई के पत्थर फैकता ज़रूर हूँ,
अपना ग़म लोगों से बता नहीं सकता यार,
खुद से तेरी हर बात छेड़ता ज़रूर हूँ !!

Thursday, October 17, 2013

यदि कोई व्यक्ति आपको गुस्सा दिलाने में सफल हो जाता है 
तो समझ लीजिये आप  ….  उसके हाथ की कठपुतली हैं !!