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ज़िन्दगी

Friday, May 31, 2013

लोरी गाकर सुनाया ही नहीं

ठंडी हवा भी हमें जला गयी,
और ये क्या ..पटाखों ने तो शोर मचाया ही नहीं!
चलना तो जैसे -तैसे, हमने सीख ही लिया,
फिर किसी ने .....लोरी गाकर सुनाया ही नहीं!!

अक्सर बात किया करते हैं



सलीका हो ग़र भीगी पलकों को पढ़ने का,
तो बहते हुए आंसु, अक्सर बात किया करते हैं !!

Wednesday, May 29, 2013

काश..एक रूह की खातिर ........तुम यहाँ होते ,  एक नज़्म बनकर !
तो  समेट  लेता तुम्हे पन्नो में  चुन - चुनकर !!
मोड़कर पन्नो को भर देता लिफ़ाफे में ,
और भेज देता उसे .....आपके घर पर !!
काश तुम यहाँ होते एक नज़्म  बनकर !!

चेहरा बदलते देखा है !!!




बादल के आगे चाँद को भी मचलते देखा है, 
पलकों के नीचे, आँखों को भी संभलते देखा है!!
पर ये ज़रूरी नहीं की हर शीशा आपके चेहरे का गुलाम हो ....क्योंकि दोस्त,
हमने आईने  के आगे चेहरा बदलते देखा है !!!

सज़ा है !!!


 डूबी है,  मेरी उँगलियाँ, मेरे ही ख़ून में .......................दोस्तों ,
ये चंद  कांच के टुकडो पे भरोसे की सज़ा है !!!
 

Wednesday, May 15, 2013

कहीं जाने की!



जलते हुए शहरों में इजाफा ही तो होगा,
जब रस्म  ही नहीं है, ...कोई आग बुझाने की! 
ग़र  नियत ही ठीक नहीं है इस ज़माने की,
जल्दी तो मुझे भी नहीं है, कहीं जाने की!!