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ज़िन्दगी

Wednesday, May 29, 2013

काश..एक रूह की खातिर ........तुम यहाँ होते ,  एक नज़्म बनकर !
तो  समेट  लेता तुम्हे पन्नो में  चुन - चुनकर !!
मोड़कर पन्नो को भर देता लिफ़ाफे में ,
और भेज देता उसे .....आपके घर पर !!
काश तुम यहाँ होते एक नज़्म  बनकर !!

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