zindagi
ज़िन्दगी
ज़िन्दगी
Wednesday, May 15, 2013
कहीं जाने की!
जलते हुए शहरों में इजाफा ही तो होगा,
जब रस्म ही नहीं है, ...कोई आग बुझाने की!
ग़र नियत ही ठीक नहीं है इस ज़माने की,
जल्दी तो मुझे भी नहीं है, कहीं जाने की!!
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