Monday, November 26, 2012
वीरान तुम भी हो
माना की हम हैं उजड़े हुए शहर की मिसाल .....!!
मगर आंखे बता रही है , वीरान तुम भी हो .....!!!
जब होश में आया
अपनों को जोड़ने में इतने मगन हो गए थे हम ...... मनो खो गए थे हम ,,
और जब होश में आया तो .......... अपने वजूद के बिखरे टुकड़े को देखा !!
मुहब्बत की दुकान
ना पूछिये तो बेहतर होगा की क्या हाल है ........... मेरे कारोबार का,,
मुहब्बत की दुकान चला रहा हुं मैं ...........नफ़रतों की इस बाज़ार में !!
Friday, November 16, 2012
फिर ज़रूरत क्या थी
ज़रूरत क्या थी तुम्हें, ........ फासले बढ़ाने की,
ज़रूरत क्या थी तुम्हें, .....मुझसे रूठ जाने की ।।
अब जो उदास रहते हो मुझसे रूठकर,,
ज़रूरत क्या थी ......मुझसे हाथ छुड़ाने की ।।
किसी के गम को ये ज़ालिम दुनिया, अपना गम नहीं समझती
ज़रूरत क्या थी, तुम्हे अपना गम दुनिया को दिखने की ।।
काश तुम ..........ये समझ पाती ............................,,
कि हर- पल मैं तुम्हारे साथ था ,,
फिर ज़रूरत क्या थी, ........... तुम्हें इस ज़माने की |||
शुरुवात तो दो
हर दिन ......... एक ख़्वाब दो ज़िन्दगी को,
चाहे पूरा हो या न हो ... पर दिल से आवाज़ तो दो ।।
देखना एक दिन ऐसा भी आएगा, पुरे होंगें आपके सारे ख़्वाब,,
उन ख़्वाबों को बस एक शुरुवात तो दो ।।।
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