Tuesday, March 30, 2010
Monday, March 29, 2010
logon ka kya hai kahne do
वो लम्हा, वो पल बार - बार याद आता है
क्या कहुं, कैसे रहूँ, सोचकर दिल घबराता है
सोचता हूँ वक़्त समझकर तुमको भूल जाऊं
क्या करूँ भूलने की थोड़ी सी कोशिश से भी
आँखों में आंसू भर आता है
रो - रो कर भी अपना हाले दिल किसके सामने करूँ बयाँ
जो भी होता है, मुझे पागल समझ लेता है
न सोच सकूँ मैं, न समझ सकूँ मैं
क्या पागल भी कभी रोता है
न दिल बच्चा है, न दिमाग ही बचा
क्या करूँ, ये प्यार भी तो है , एक बार ही होता
काश प्यार न होता इस दुनियां में
इस दुनियां का क्या होता ?
बादल की गरज, बिजली की चमक को लोग क्या समझे
दरअसल वो छुप-छूप के है, मेरी तरह तन्हाई में रोता
उनके आंसू तड़पकर, ग़रज़ कर बरसे इस ज़मीं पर
लोगों का क्या है, उनके आसुओं को पानी की तरह पीते हैं
और एक मेरा दिल है की.... बस उसकी यादों में जीता है
औरों को क्या है, जो भी आये उनके जी में, कहते हैं
की ये आशीष किसी के प्यार में बेवज़ह मरता है
Thursday, March 18, 2010
हो सके तो... अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको
तुम कहो तो मैं समंदर में भी समां जाऊं
फूलों की माला में भी गूथ जाऊं
पर तुम कभी भी ना..ना ठुकराना मुझको
कोई पागल भी कहता हो, पर तुम नाम मेरा लेके बुला लेना मुझको
तूने देखा नहीं दिल से आईने को कभी
पर सोलह श्रृंगार करती हो सभी
हो सके तो एक बार गौर से अपनी आँखों में देखना
आईना तुम्हारा होगा, पर खुद की जगह पाओगी मुझको
ज़िन्दगी पल-पल बदलती है, पता है हम सबको
कल की बात कल पे छोड़ो
जितना जी चाहे तेरा..आज सता ले मुझको
साँसे कहीं रुक न जाए , कहता हूँ सांसों में बसा ले मुझको
कर दिया तूने अगर खुद को मेरे हवाले
मेरी ये दुनियाँ सँवर जागेगी
पतझड़ बनी ये ज़िन्दगी, फूलों सी महक जायेगी
वादा है फिर.. मैं ज़हर भी हंस के पी जाऊंगा
शर्त ये है तू एक बार बाँहों में सम्भाले मुझको
Monday, March 15, 2010
दास्ताँ ऐ ज़िन्दगी
हर लब पे मेरे अफ़साने हैं
बर्वादी है रुसवाई है
सीने में सुलगती यादें हैं
आंसू है, और तन्हाई है
किस - किस को सुनाऊं मैं दोस्तों
क्या कर मेरा हाल हुआ
बस मुझसे ये भूल हुयी
एक बेदर्द से आंख मिलायी थी
बर्वादी है रुसवाई है
सीने में सुलगती यादें हैं
आंसू है, और तन्हाई है
किस - किस को सुनाऊं मैं दोस्तों
क्या कर मेरा हाल हुआ
बस मुझसे ये भूल हुयी
एक बेदर्द से आंख मिलायी थी
काश तुमने समझा होता समझ न सका
Sunday, March 14, 2010
काश
तुमने चाहा ही नहीं, वर्ना हालात बदल सकते थे
तेरे आँखों के आंसू, मेरे आँखों से निकल सकते थे
तुम एक झील बनकर रह गयी, गर बन जाते दरिया
तो साहील में निकल सकते थे
तेरे आँखों के आंसू, मेरे आँखों से निकल सकते थे
तुम एक झील बनकर रह गयी, गर बन जाते दरिया
तो साहील में निकल सकते थे
beauti
हंसी चाँद तेरा अक्स लगे है
चेहरे की रंगत पागल करे है
जुल्फों में शाम तेरी, पलकों पे सुबह
तेरे इंतज़ार में हम, कब से खड़े हैं
चेहरे की रंगत पागल करे है
जुल्फों में शाम तेरी, पलकों पे सुबह
तेरे इंतज़ार में हम, कब से खड़े हैं
dost
किसी ने पूछा दोस्त क्या है ......?
मैने काँटो पे चल कर बता दिया....
फिर
पूछा कितना प्यार करोगे दोस्त को....?
मैने पूरा आसमान दिखा दिया.......
फिर
कहा कैसे रखोगे दोस्त को....?
मैने हल्के से फूलों को सहला दिया......
तब
उसने कहा किसी की नज़र लग गयी तो ?
मैने पल्को में उस को छुपा
लिया......
आखिर में उसने पूछा जान से भी प्यारा दोस्त किसे कहते हो ?
तो
मैने आपका नाम बता दिया
मैने काँटो पे चल कर बता दिया....
फिर
पूछा कितना प्यार करोगे दोस्त को....?
मैने पूरा आसमान दिखा दिया.......
फिर
कहा कैसे रखोगे दोस्त को....?
मैने हल्के से फूलों को सहला दिया......
तब
उसने कहा किसी की नज़र लग गयी तो ?
मैने पल्को में उस को छुपा
लिया......
आखिर में उसने पूछा जान से भी प्यारा दोस्त किसे कहते हो ?
तो
मैने आपका नाम बता दिया
जीतने की कोशिश
जीवन बनकर रह गयी एक पहेली
खड़ा रह गया मैं अकेला
न कोई रस्ते हैं .... बस सोची है इक मंजिल
न कोई अपना है ,.... बस नाम के हैं साथी
फिर भी जी रहा हूँ , ..........निगाहों को ये आस देकर
ये और बात है की आज मेरी कोई कद्र नहीं करता
कल ज़माना करेगा
कोई जनता नहीं ?
कल होगा सबकी ज़बां पे मेरा ही नाम
हाँ .. मैं संघर्ष करूँगा,....... जीवन प्रयत्न लडूंगा
संभव है,................. मैं हार भी गया
फिर भी जीतने की कोशिश करूँगा।
Subscribe to:
Posts (Atom)



