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ज़िन्दगी

Monday, March 15, 2010

काश तुमने समझा होता समझ न सका




ग़म तो हमें इस बात का है
एहसास दिला ना पायें, तुम्हे अपने प्यार का
बस.... डर इस बात का था, की कही तुम रूठ ना जाओ
और हम चाहकर भी तुम्हें मना ना सके
कहीं तुम गैर के ना हो जाओ किसी मोड़ पर
इस डर से तुम्हें कभी अपना ना सके..............!


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