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ज़िन्दगी

Sunday, March 14, 2010

काश

तुमने चाहा ही नहीं, वर्ना हालात बदल सकते थे
तेरे आँखों के आंसू, मेरे आँखों से निकल सकते थे
तुम एक झील बनकर रह गयी, गर बन जाते दरिया
तो साहील में निकल सकते थे

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