zindagi
ज़िन्दगी
ज़िन्दगी
Monday, March 15, 2010
दास्ताँ ऐ ज़िन्दगी
हर
लब
पे
मेरे
अफ़साने
हैं
बर्वादी
है
रुसवाई
है
सीने
में
सुलगती
यादें
हैं
आंसू
है
,
और
तन्हाई
है
किस
-
किस
को
सुनाऊं
मैं
दोस्तों
क्या
कर
मेरा
हाल
हुआ
बस
मुझसे
ये
भूल
हुयी
एक
बेदर्द
से
आंख
मिलायी
थी
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