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ज़िन्दगी

Sunday, March 14, 2010

जीतने की कोशिश



जीवन बनकर रह गयी एक पहेली
खड़ा रह गया मैं अकेला
न कोई रस्ते हैं .... बस सोची है इक मंजिल
न कोई अपना है ,.... बस नाम के हैं साथी
फिर भी जी रहा हूँ , ..........निगाहों को ये आस देकर
ये और बात है की आज मेरी कोई कद्र नहीं करता
कल ज़माना करेगा
कोई जनता नहीं ?
कल होगा सबकी ज़बां पे मेरा ही नाम
हाँ .. मैं संघर्ष करूँगा,....... जीवन प्रयत्न लडूंगा
संभव है,................. मैं हार भी गया
फिर भी जीतने की कोशिश करूँगा।

1 comment:

  1. nice dear
    thanx 4 advice
    koshish karne walon ki haar nahi hoti
    good lage raho

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