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ज़िन्दगी

Saturday, October 23, 2010

जीवन का एक और पन्ना ...







इस छोटी सी जिन्दगी के,गिले-शिकवे मिटाना चाहता हूँ,
सबको अपना कह सकूँ, ऐसा ठिकाना चाहता हूँ,
टूटे तारों को जोड़ कर,फिर आजमाना चाहता हूँ,
बिछुड़े जनों से स्नेह का,मंदिर बनाना चाहता हूँ.
हर अन्धेरे घर मे फिर,दीपक जलाना चाहता हूँ
खुला आकाश मे हो घर मेरा,नही आशियाना चाहता हूँ,
जो कुछ दिया खुदा ने,दूना लौटाना चाहता हूँ,
जब तक रहे ये जिन्दगी,खुशियाँ लुटाना चाहता हूँ
कुछ ऐसा ही है  जीवन का एक और पन्ना ...

दोस्ती के शब्‍दकोश से ही लिए है

दोस्त काश तुम न होते 
जिसे मैंने शब्‍दों में बयां कर दिया
वो मेरा अतीत था
वो दोस्त सिर्फ़ याद बनकर
इस कागज़ में उतर गया,
और जिसे मैं शब्‍द नहीं दे पाया
वो मेरी आत्‍मा में है,
जो मेरी आंखों में, मेरे होंठो पर,
मेरी बातों में, मेरे हंसने-रोने में,
मेरे दिल की धड़कनों में है,
जो हर रूप में मेरे सामने है
कभी दोस्‍त, कभी बेशुमार प्‍यार देने वाला!
जो मेरे अंदर जीने की ख्‍वाहिश बनकर रहा है
उसकी ये शिकायत है....
उसके लिए मैंने कुछ नहीं लिखा
पर उसे ये भी पता है
कि ये सारे शब्‍द मैंने उसके 
दोस्ती के शब्‍दकोश से ही लिए है

Monday, October 18, 2010

कोई दोस्त ऐसा बनाया जाये,
जिसके आसुओं को पलकों में छुपाया जाए,
रहे उसका मेरा रिश्ता कुछ ऐसा,
की अगर वो रहे उदास तो हमसे भी न मुस्कुराया जाये

Friday, October 15, 2010

थक चुके हैं, तरस चुके हैं

ज़िन्दगी की चाहत तो है हमें, मगर कमबख्त ज़िन्दगी रास नहीं आती 
मौत को गले लगाना चाहते हैं, मगर मौत पास नहीं आती
थक  चुके हैं, तरस चुके हैं ..........हम इस ज़िन्दगी से,
और एक उनकी यादें हैं, जो तड़पाने से बाज़ नहीं आती

Wednesday, October 13, 2010

हँसते - हँसते ग़म सह लेते हैं

दोस्ती तो कुछ आप जैसो से
है
मत इंतज़ार कराओ हमे इतना
कि वक़्त के फैसले पर अफ़सोस हो
जाये,
क्या पता कल तुम लौटकर आओ
और हम खामोश हो जाएँ
दूरियों से फर्क पड़ता
नहीं
बात तो दिलों कि नज़दीकियों से होती है
दोस्ती तो कुछ आप जैसो से
है
वरना मुलाकात तो जाने कितनों से होती है
दिल से खेलना हमे आता
नहीं
इसलिये इश्क की बाजी हम हार गए
शायद मेरी ज़िन्दगी  से बहुत प्यार था
उन्हें
इसलिये मुझे जिंदा ही मार गए
मना लूँगा आपको रुठकर तो देखो,
जोड़
लूँगा आपको टूटकर तो देखो।
नादाँ हूँ पर इतना भी नहीं ,
थाम लूँगा आपको छूट
कर तो देखो।
लोग मोहब्बत को खुदा का नाम देते है,
कोई करता है तो इल्जाम देते
है।
कहते है पत्थर दिल रोया नही करते,
और पत्थर के रोने को झरने का नाम देते
है।
भीगी आँखों से मुस्कराने में मज़ा और है,
हसते हँसते पलके भीगने में मज़ा
और है,
बात कहके तो कोई भी समझ लेता है,
पर खामोशी कोई समझे.. तो मज़ा और
है...!
मुस्कराना ही ख़ुशी नहीं होती,
उम्र बिताना ही ज़िन्दगी नहीं
होती,
दोस्त को रोज याद करना पड़ता है,

आँखों में  चुपके  से आंसू आ जाते हैं 
और दिल खोलकर मुस्कुराना पड़ता है!
कुछ लोग ऐसे भी होते हैं 
जो दिल का हाल पढ़ लेते हैं 
क्या उनमें से आप भी हैं?
जो हँसते - हँसते  ग़म सह लेते हैं




Tuesday, October 12, 2010

ख़ुद से बढ़ कर कोई दुनिया में हमसफ़र नही होता!

आज अपनो ने ही सीखा दिया हमे
क्यूं कहते हो मेरे साथ कुछ भी बेहतर नही होता,
सच ये है के जैसा चाहो, वैसा नही होता ||
कोई सह लेता है, कोई कह लेता है,
क्यूँकी ग़म.. कभी ज़िंदगी से बढ़ कर नही होता ||
आज अपनो ने ही सीखा दिया हमे,
यहाँ ठोकर देने वाला हर कोई पत्थर नही होता||
क्यूं ज़िंदगी की मुश्क़िलो से हारे बैठे हो,
इसके बिना कोई मंज़िल, कोई सफ़र नही होता||
कोई तेरे साथ नही है तो भी ग़म ना कर,
ख़ुद से बढ़ कर कोई दुनिया में हमसफ़र नही होता!!!