zindagi
ज़िन्दगी
ज़िन्दगी
Wednesday, October 17, 2012
तन्हाई के काबिल ना थी
लोग ज़िन्दगी को जी भरकर जी लेने को कहते हैं
पर अपनी नज़रों से देखा तो, हर कोई मतलबी लगा मुझे
इसलिए लोगों से मिलना जुलना छोड़ दिया
वर्ना मेरी ये छोटी सी उम्र और ये प्यारी सी ज़िन्दगी
तन्हाई के काबिल ना थी
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