उम्मीदों की ख्वाहिश पाले दिल में
चलते रहें अंजान राहों पे हम
मंज़र डरावना है, पर उनसे मिलने की चाहत में

खुशियों से ऑंखें हो रही है नम
आखिरकार खुदा ने मेरी सुनी और उनका दीदार हुआ
ये पल अनमोल था मेरे लिए
शायद मुझसा बदनसीब कौन होगा
मेरे कंधे पे सर रखकर वो रोये भी तो जी भरके
पर वो आंसू भी था तो किसी और के लिए
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