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ज़िन्दगी

Monday, October 15, 2012

वो आंसू भी था तो किसी और के लिए





उम्मीदों की ख्वाहिश पाले दिल में

चलते रहें अंजान राहों पे हम

मंज़र डरावना है, पर उनसे मिलने की चाहत में
खुशियों से ऑंखें हो रही है नम

आखिरकार खुदा ने मेरी सुनी और उनका दीदार हुआ

ये पल अनमोल था मेरे लिए

शायद मुझसा बदनसीब कौन होगा



मेरे कंधे पे सर रखकर वो रोये भी तो जी भरके

पर वो आंसू भी था तो किसी और के लिए

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