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ज़िन्दगी

Friday, October 19, 2012

कहीं उनकी नींद न टूट जाए




हीर - राँझा , श्री - फरहाद की प्रेम के किस्से को लोगों ने दिल में बसाया है

कहानियों से निकल कर एक और आशिक उभर आया है

इसकी कहानी, सारी प्रेम गाथा से निराली है

अश्कों से भरी वो प्याली है

जो छलक जाए तो ज़ाम है, और गिर जाए तो बदनाम है

इनके प्यार को न लग जाए ज़माने की नज़र

आशिक की महबूबा आशिक के दिल पे सर रखकर सोयी थी बेखबर

आशिक ने धड़कन ही रोक ली की, कहीं उनकी नींद न टूट जाए


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