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ज़िन्दगी
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Thursday, October 4, 2012
दुआ को आजमाएंगे !!
करते हैं वो हरपल मुकद्दर की बातें
मुश्किल से कटती हैं तमाम रातें
दुर वो मुझसे जाना नहीं चाहते
पल - पल हैं मुझे आजमाते
आखिर एक दिन मैंने भी कह दिया
देखते है, हम दोनों ज़ुदा कैसे हो पायेंगें ?
तुम मुक्कदर का लिखा मानती हो, और हम दुआ को आजमाएंगे !!
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