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ज़िन्दगी

Monday, December 10, 2012

ज़िन्दगी जीने का तरीका तो तुम्हें आता है !!!


 
 
एक वक़्त था , मुझे बहुत   नाज़ होता था , हमें हमारी दोस्तों की  दोस्ती पे,
शायद वक़्त और हालत पे .............मैं गलत हो सकता हूँ ,
पर एक दिन ऐसा भी आया, मैं सुकून से सोया था ,
बिस्तर तो मेरा था, और जगह भी मेरी थी  ,
आये मेरे सारे दोस्त ............मेरे ही मय्यत पे,,,,
और आकर कहने लगे 
कितनी देर है अभी दफनाने में  !!
जल्दी करो हमें ......घर जाना है !!
कपडे दान कर, नया खरीदकर , नहाना है,,
दिनभर के नुकसान को भी  , संभालना है,,
हे  दोस्त, मेरे दोस्त, तेरे पे नाज़ आता है  ,,
झूठे गम सही, ज़िन्दगी जीने का  तरीका तो तुम्हें आता है !!!

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