Thursday, October 18, 2012
Wednesday, October 17, 2012
तन्हाई के काबिल ना थी

लोग ज़िन्दगी को जी भरकर जी लेने को कहते हैं
पर अपनी नज़रों से देखा तो, हर कोई मतलबी लगा मुझे
इसलिए लोगों से मिलना जुलना छोड़ दिया
वर्ना मेरी ये छोटी सी उम्र और ये प्यारी सी ज़िन्दगी
तन्हाई के काबिल ना थी
Monday, October 15, 2012
वो आंसू भी था तो किसी और के लिए
उम्मीदों की ख्वाहिश पाले दिल में
चलते रहें अंजान राहों पे हम
मंज़र डरावना है, पर उनसे मिलने की चाहत में
Thursday, October 4, 2012
Wednesday, October 3, 2012
Friday, September 7, 2012
चंद कागज के टुकड़ों में
अब किसी को अपना कहने की हिम्मत कैसे करें
लोगों की नीयत अपने हल्कों से फिसलने लगे हैं
चाहत थी कुछ को जोड़कर कारवां बनाने की
पर क्या करें यहाँ तो लोग चंद कागज के टुकड़ों में बिकने लगे हैं
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