Thursday, June 3, 2010
Wednesday, June 2, 2010
Dosti
फूलों सी नाजुक चीज है दोस्ती,
सुर्ख गुलाब की महक है दोस्ती,
सदा हँसने हँसाने वाला पल है दोस्ती,
दुखों के सागर में एक कश्ती है दोस्ती,
काँटों के दामन में महकता फूल है दोस्ती,
जिंदगी भर साथ निभाने वाला रिश्ता है दोस्ती,
रिश्तों की नाजुकता समझाती है दोस्ती,
रिश्तों में विश्वास दिलाती है दोस्ती,
तन्हाई में सहारा है दोस्ती,
मझधार में किनारा है दोस्ती,
जिंदगी भर जीवन में महकती है दोस्ती,
किसी-किसी के नसीब में आती है दोस्ती,
हर खुशी हर गम का सहारा है दोस्ती,
हर आँख में बसने वाला नजारा है दोस्ती,
कमी है इस जमीं पर पूजने वालों की वरना इस जमीं पर "भगवान् " है दोस्ती !!!
सुर्ख गुलाब की महक है दोस्ती,
सदा हँसने हँसाने वाला पल है दोस्ती,
दुखों के सागर में एक कश्ती है दोस्ती,
काँटों के दामन में महकता फूल है दोस्ती,
जिंदगी भर साथ निभाने वाला रिश्ता है दोस्ती,
रिश्तों की नाजुकता समझाती है दोस्ती,
रिश्तों में विश्वास दिलाती है दोस्ती,
तन्हाई में सहारा है दोस्ती,
मझधार में किनारा है दोस्ती,
जिंदगी भर जीवन में महकती है दोस्ती,
किसी-किसी के नसीब में आती है दोस्ती,
हर खुशी हर गम का सहारा है दोस्ती,
हर आँख में बसने वाला नजारा है दोस्ती,
कमी है इस जमीं पर पूजने वालों की वरना इस जमीं पर "भगवान् " है दोस्ती !!!
Tuesday, March 30, 2010
Monday, March 29, 2010
logon ka kya hai kahne do
वो लम्हा, वो पल बार - बार याद आता है
क्या कहुं, कैसे रहूँ, सोचकर दिल घबराता है
सोचता हूँ वक़्त समझकर तुमको भूल जाऊं
क्या करूँ भूलने की थोड़ी सी कोशिश से भी
आँखों में आंसू भर आता है
रो - रो कर भी अपना हाले दिल किसके सामने करूँ बयाँ
जो भी होता है, मुझे पागल समझ लेता है
न सोच सकूँ मैं, न समझ सकूँ मैं
क्या पागल भी कभी रोता है
न दिल बच्चा है, न दिमाग ही बचा
क्या करूँ, ये प्यार भी तो है , एक बार ही होता
काश प्यार न होता इस दुनियां में
इस दुनियां का क्या होता ?
बादल की गरज, बिजली की चमक को लोग क्या समझे
दरअसल वो छुप-छूप के है, मेरी तरह तन्हाई में रोता
उनके आंसू तड़पकर, ग़रज़ कर बरसे इस ज़मीं पर
लोगों का क्या है, उनके आसुओं को पानी की तरह पीते हैं
और एक मेरा दिल है की.... बस उसकी यादों में जीता है
औरों को क्या है, जो भी आये उनके जी में, कहते हैं
की ये आशीष किसी के प्यार में बेवज़ह मरता है
Thursday, March 18, 2010
हो सके तो... अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको
तुम कहो तो मैं समंदर में भी समां जाऊं
फूलों की माला में भी गूथ जाऊं
पर तुम कभी भी ना..ना ठुकराना मुझको
कोई पागल भी कहता हो, पर तुम नाम मेरा लेके बुला लेना मुझको
तूने देखा नहीं दिल से आईने को कभी
पर सोलह श्रृंगार करती हो सभी
हो सके तो एक बार गौर से अपनी आँखों में देखना
आईना तुम्हारा होगा, पर खुद की जगह पाओगी मुझको
ज़िन्दगी पल-पल बदलती है, पता है हम सबको
कल की बात कल पे छोड़ो
जितना जी चाहे तेरा..आज सता ले मुझको
साँसे कहीं रुक न जाए , कहता हूँ सांसों में बसा ले मुझको
कर दिया तूने अगर खुद को मेरे हवाले
मेरी ये दुनियाँ सँवर जागेगी
पतझड़ बनी ये ज़िन्दगी, फूलों सी महक जायेगी
वादा है फिर.. मैं ज़हर भी हंस के पी जाऊंगा
शर्त ये है तू एक बार बाँहों में सम्भाले मुझको
Monday, March 15, 2010
दास्ताँ ऐ ज़िन्दगी
हर लब पे मेरे अफ़साने हैं
बर्वादी है रुसवाई है
सीने में सुलगती यादें हैं
आंसू है, और तन्हाई है
किस - किस को सुनाऊं मैं दोस्तों
क्या कर मेरा हाल हुआ
बस मुझसे ये भूल हुयी
एक बेदर्द से आंख मिलायी थी
बर्वादी है रुसवाई है
सीने में सुलगती यादें हैं
आंसू है, और तन्हाई है
किस - किस को सुनाऊं मैं दोस्तों
क्या कर मेरा हाल हुआ
बस मुझसे ये भूल हुयी
एक बेदर्द से आंख मिलायी थी
Subscribe to:
Posts (Atom)



