मैं तो होश में था, फिर भी उस पे मरने लगा कैसे
ज़हर भरा ज़ाम, मेरे लहू में उतर गया कैसे
कुछ तो उसके दिल में , हमदर्दी तो ज़रूर थी वरना
वो चुपके से मेरा हाथ दबा गयी कैसे
शायद उसके दिल में कही मैं गुमसुम सा बता था
ये मैं नशे में नहीं कह रहा
अगर में नशे में हूँ, तो घर जाता कैसे

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