ना जाने क्यूँ आज ये तन्हाई का एहसास कुछ ज़यादा ही है
शायद तेरे संग ना होने का मालाल का असर है
फिर भी काट रहे हैं ये ज़िन्दगी .ये सोचकर
शायद मेरी ये ज़िन्दगी में मेरा गुनाह हद से कुछ ज़यादा ही है
वर्ना ना तड़पता ................... इस ज़िन्दगी में यूँ इस तरह
अब तो हालत ये हैं की तन्हाई बसर कर चुकी है ज़िन्दगी में इस तरह
रोना चाहता हूँ पर रो ना पाता हूँ
कहना चाहता हूँ पर कह नहीं पाता हूँ
कहूँ भी तो किसको कहूँ ?.......सबका हाल कुछ ऐसा भी है
इसलिए तो जी नहीं पाता हूँ
लिखूं भी तो क्या लिखूं ...........प्यार को दागदार भी तो नहीं कर पाता हूँ
दोस्तों के बीच गर बातें भी होती है
बस हँस के रह जाता हूँ !


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