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ज़िन्दगी

Thursday, June 27, 2013

कयामत होती

ख़ुदा  का करिश्मा ही है दोस्त ............की ये दिल बेचारा सिर्फ सुनता है ....और सुनकर सहता है,
वरना ............... ग़र इसे बोलने की आज़ादी दी जाती तो आज कयामत होती !!

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